यह ब्लॉग खोजें

मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 18 फ़रवरी 2018

अंबेडकर अभी जिंदा है!


बात उन दिनों की है जब सयाजी गायकवाड़ बडौदा रियासत के महाराज हुआ करते थे। डॉ भीमराव अंबेडकर जी ने आवश्यक शिक्षा प्राप्त कर ली थी और उच्च शिक्षा प्राप्त करने के लिए विदेश जाना चाहते थे। सयाजी गायकवाड़ ने डॉ अंबेडकर की मदद की और उन्हें ब्रिटेन भेज दिया। जब अंबेडकर अपनी पढ़ाई करके वापस आए तो उन्हें एक नौकरी की सख्त जरुरत थी क्योंकि उनके घर की आर्थिक परिस्थितियां दयनीय थी। जब यह महाराजा सयाजी को पता चला तो उन्होंने बडौदा में ही क्लर्क की नौकरी दे दी जिससे उनका जीवन यापन होने लगा। जब उनके ऑफिस में ही उनके साथ सामान्य जाति के नौकरों के द्वारा दुर्व्यवहार किया जाने लगा जिसमें घंटों तक उनको प्यासा रहना पड़ता था, नौकर उनकी टेबिल को छूते भी नहीं थे। फाइलों को हाथ में न देकर फाइलों को फेंककर दिया जाता था। यह सब देखकर वे बहुत दु:खी हुए और नौकरी छोड़ने का मन बना लिया।

अंबेडकर को मां-बहन की गाली देने वालों क्या तुम्हारी आत्मा तुम्हें ऐसा करने के लिए एक बार भी मना नहीं करती? तुम्हें अंबेडकर को गाली देने से क्या मिलेगा? अंबेडकर ने जिस दंश को झेला है, उसी का सबसे बड़ा कारण संविधान में आरक्षण का प्रावधान है। अंबेडकर महाराष्ट्र की उस महार जाति से आते है जिसे उस सामान्य कुएं से पानी पीने पर प्रतिबंध था। जब वह रास्ते पर निकलता था तो उसकी कमर पर झाडू और मुहं के पास एक पात्र होता था। जब तक इस समाज में भेदभाव और छुआछूत की भावना रहेगी तब तक "अंबेडकर जिंदा रहेगा"।

मैंने भी छुआछूत का दंश झेला है और महसूस किया है कि कितना विध्वंसक है। भारत मेरा देश है जहां कुछ दो कौड़ी के लोग है जो गालियां देने में अपना जीवन बिताते हैं। कुछ अंबेडकर को गाली देते है और कहते है कि साला, आरक्षण लागू करके चला गया? ये तो उनके लिए सामान्य से शब्द हैं। इतने घटिया शब्दों का उपयोग किया जाता है कि मैं यहां चाहते हुए भी नहीं लिख सकता। गाली देने वाला सभी को गाली देता है, यहां तक की भगवान को भी। वर्तमान समय में लोग नरेन्द्र मोदी को भी गाली देते हैं। इससे यह सिद्ध तो नहीं होता कि नरेन्द्र मोदी घटिया व्यक्तिव्य के व्यक्ति है। नुक्स निकालना तो हर व्यक्ति का काम है लोगों ने तो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को आतंकवादी तक की संज्ञा दे दी। मैं तो केवल इतना जानता हूं कि ऐसे लोगों के मनोरंजन का यह विषय बन चुका है। इंसान अच्छा अपने कर्मों से होता है।

मेरी हमेशा ही आरक्षण को लेकर बहस होती रहती है। जो सामान्य वर्ग के व्यक्ति है वह चाहते है कि आरक्षण लाकर अंबेडकर ने गलत किया है। बोलते हैं कि आरक्षण से कभी अनुसूचित जाति(sc) और अनुसूचित जनजाति(st) का कभी भला नहीं हो सकता। मैं तो कहता हूं कि आरक्षण भला करने के लिए नहीं है बल्कि प्रोत्साहित करने के लिए था और है। पूना पैक्ट की बात करते है और कहते है कि किस प्रकार अंबेडकर गांधी के सामने अड़ गए थे। जरा जाकर सच्चाई तलाशों फिर आकर बात करना।

जब तक इस देश में छुआछूत, भेदभाव, जातिगत अत्याचार व्याप्त है तब तक अंबेडकर जिंदा रहेगा। जब तक कुछ सामान्य और सवर्ण जाति के लोग अपनी मानसिकता बदलकर पिछड़ों को अगड़े बनाने में मदद नहीं करते तब तक अंबेडकर जिंदा रहेगा। जब तक सामाजिक बुराइयों से समाज उलझा रहेगा तब तक अंबेडकर जिंदा रहेगा। मैं किसी व्यक्ति विशेष का पैरोकार नहीं हूं। मैं तो बस सच्चाई सामने रखने की कोशिश कर रहा हूं। मैं तो सभी का सम्मान करने वाले व्यक्ति में से एक हूं। मुझे स्कूल में तो यही सिखाया गया है। मैं उस व्यक्ति की बिल्कुल भी इज्जत नहीं करता जो देश विरोधी बात करते है, किसी भी प्रकार से देश को तोड़ने की बात करते हैं, सामाज में बुराइयां फैलाते है।

संविधान निर्माण का कार्य किसी एक व्यक्ति का काम नहीं था। प्रारुप समिति का अध्यक्ष डॉ भीमराव अंबेडकर को बनाया गया। जब प्रारुप संसद में पेश किया गया तब संसद सदस्यों ने इसे पास कर दिया और यह संविधान बन गया। इसी प्रारुप में आरक्षण का प्रावधान था। जिसे संसद सदस्यों ने पास किया। डॉ अंबेडकर का आरक्षण लागू कराने में कितना रोल है? यह सब जानते हैं, फिर भी फालतू की बहस करते है। अच्छा, एक बड़ी बात यह भी है कि कई ऐसे भी लोग है जिन्हें संविधान स्वीकार्य नहीं है। यही लोग अपने आप को बड़ा देश भक्त बताते हैं।

आरक्षण कोई मनोरंजन का विषय नहीं है। आरक्षण केवल उन पद दलित लोगों के लिए है जो समाज की तेज रफ्तार दौड़ में कहीं पीछे छूट गए। जिनकी एक भी पीढ़ी राजनीति, अर्थनीति, शास्त्रों, सांस्कृतिक व्यवहार आदि से परिचित नहीं है। आरक्षण उनके लिए है जिन्हें सामाजिक सहारे की जरुरत है जो समाज के जीवन से अनभिज्ञ हैं। आरक्षण उनके लिए नहीं है जो आरक्षण का उपयोग करके डॉक्टर, इंजीनियर, सांसद, विधायक बनकर लंबी-लंबी कारों में घूमें और अपनी आने वाली पीढ़ी को आरक्षण का लाभ दें। अन्य पिछड़ा वर्ग के व्यक्ति को आय के आधार पर आरक्षण मिलता है इसी प्रकार एससी और एसटी के लिए भी होना चाहिए ताकि नए लोगों को मौका मिल सकें। सरकार को इस प्रकार की व्यवस्था करनी चाहिए कि जिन्हें आरक्षण का लाभ नहीं चाहिए वे इसका त्याग कर सकें।

मैं तो केवल इतना जानता हूं कि मेरे प्यारे भारत देश में छुआछूत, भेदभाव, जातिगत अत्याचार नहीं होना चाहिए। जब तक सभी लोग मिलकर समभाव की भावना नहीं रखते तब तक भारत महान कैसे बनेगा।आपको तो अंबेडकर से ज्यादा अंग्रेजों को गाली देनी चाहिए जिन्होंने भारत को सामाजिक, आर्थिक, सांस्कृतिक, राजनीतिक, वैचारिक, बौद्धिक आदि अनेक रुप से कमजोर किया है। जिसका परिणाम हम आज तक भुगत रहे हैं। मांटेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार लाकर जो अंग्रेजों ने किया है हमें तो उसे गाली देनी चाहिए। जातिवाद वर्जित है और वर्जित ही रहना चाहिए।

                          ।।जय हिंद।।

📃BY _vinaykushwaha